टायरों का रंग काला ही क्‍यों होता है, क्‍या होगा अगर बाइक-कार वगैरह के Tyre किसी और रंग के बनाए जाएं तो?

टायरों का रंग काला ही क्‍यों होता है, क्‍या होगा अगर बाइक-कार वगैरह के Tyre किसी और रंग के बनाए जाएं तो?

रंगों की एक अपनी दुनिया होती हैं. आसमान नीला, सूरज लाल-पीला और चमकीला… हमारे शरीर का रंग गोरा, गेहुंआ, सांवला वगैरह. ये तो हुए प्राकृतिक रंग. लेकिन कृत्रिम चीजों के रंग हम अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार तैयार करते हैं. आपने सड़क पर चलने वाले वाहन बहुतेरे रंगों में देखे होंगे, लेकिन सभी में जो एक बात कॉमन होती है, वह है उनके टायरों का रंग.

क्या आपनके कभी सोचा है कि बाइक और कार से लेकर बड़े-बड़े वाहनों के टायरों का रंग काला ही क्यों होता है? बच्चों की साइकिल की तरह उनके टायर लाल, पीले, हरे या अन्य किसी रंग के क्यों नहीं होते? होंगे तो खूबसूरत दिखेंगे, न! लेकिन टायरों के खूबसूरत होने से ज्यादा उनका मजबूत होना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.

क्यों काले होते हैं टायर?

काले रंग के ही क्यों बनाए जाते हैं टायर, हरे-नीले-लाल क्यों नहीं? जानिए  यहाँ » Desi Khabar

टायर का इतिहास काफी पुराना है. जब रबर की खोज हुई और फिर जब उससे टायर बनाए जाने लगे, तो वे बहुत जल्दी घिस जाते थे. इसके बाद थोड़ी और रिसर्च की गई और पाया गया कि रबर में कार्बन और सल्फर मिलाकर इसे मजबूत किया जा सकता है. जैसा कि आप जानते हैं कि रबर का प्राकृतिक रंग काला नहीं होता, लेकिन जब इसमें कार्बन और सल्फर मिलाया जाता है तो इसका रंग काला हो जाता है.

क्यों मिलाए जाते हैं कार्बन?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चा रबर हल्के पीले रंग का होता है, लेकिन टायर बनाने के लिए उसमें कार्बन मिलाया जाता है, ताकि रबर जल्दी न घिसे. मजबूती के लिए ही इसमें कार्बन मिलाया जाता है. कार्बन का रंग काला होता है. इसलिए टायर भी काले होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सादा रबर का जो टायर करीब 8 हजार किलोमीटर चल सकता है, वही कार्बनयुक्त रबर का टायर 1 लाख किलोमीटर तक चल सकता है. कार्बन के साथ इसमें सल्फर भी मिलाया जाता है. स्पष्ट है कि टायर बनाने के लिए रबर में कार्बन उनकी मजबूती के लिए मिलाए जाते हैं.

रबर में मिलाए जाने वाले कार्बन की भी कई श्रेणियां होती हैं. रबर मुलायम होगी या सख्त, यह उसमें मिलाई जानेवाली कार्बन की श्रेणी पर निर्भर करता है. मुलायम रबर के टायरों की पकड़ मजबूत होती है लेकिन वो जल्दी घिस जाते हैं. वहीं, कार्बन और सल्फर युक्त रबर के टायर आसानी से नहीं घिसते.

अगर टायर को किसी दूसरे कलर में बनाया जाए तो?

टायर का रंग काला ही क्यों होता है, कोई और रंग क्यों नहीं? - Quora

आपने छोटे बच्चों की साईकिल में रंगीन टायर देखा होगा. चूंकि बच्चों के साईकिल का सुंदर दिखना उनके टायर के मजबूत होने से ज्यादा मायने रखता है, इसलिए उनमें रंगीन टायर भी चलते हैं. बच्चों की साईकिल पर ज्यादा बोझ भी नहीं होता. बच्चों की साईकिल कम दूरी के लिए होती हैं और उनके टायर के घिसकर खत्म होने में बहुत दिन लगते हैं. बच्चों की साइकिल में लगे रंगीन टायर ठोस भी होते हैं. बहुत सारे टायरों में हवा भरने की जरूरत नहीं होती, इसलिए वे ठीकठाक चल जाते हैं.

ऐसे में आप समझ गए होंगे कि बड़ों की साईकिल, बाइक, कार या बड़े वाहनों के टायर अगर दूसरे रंग में बनाए जाएं तो क्या होगा? जाहिर है कि रंगीन टायर बनाने के लिए रबर में रंग मिलाना होगा और कार्बन और सल्फर की मात्रा कम… बहुत कम करनी होगी. इस तरह तैयार किए गए टायर मजबूत नहीं होंगे. हालांकि तकनीकी युग में लगातार प्रयोग हो रहे हैं और हो सकता है कि मजबूत टायर बनाने के लिए रबर में मिलाए जाने वाले कार्बन का कोई विकल्प ढूंढ लिया जाए और भविष्य में कार, ट्रक वगैरह में रंगीन और सुंदर टायर नजर आए.नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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