सिक्को के नीचे बने निशान का क्या मतलब होता हैं। देखिए video

सिक्को के नीचे बने निशान का क्या मतलब होता हैं। देखिए video

भारतीय करेंसी पर जितने भी निशान या साइन बने होते हैं उन सबका एक मतलब होता है जिनके बारे में लोगों को कम ही जानकारी होती है. आज हम नोट के बारे में नहीं, बल्कि भारतीय करेंसी के सिक्कों के बारे में आपको जानकारी देने जा रहे हैं. क्या कभी आपने सिक्कों पर बने अलग-अलग निशानों को गौर किया है. वो निशान सिक्के (dots on coins meaning) के बारे में एक खास चीज बताते हैं. सिक्कों के निर्माण को मिंटिंग कॉइन (minting of coins) कहते हैं. भारत में सिक्कों की मिंटिंग सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCI) के द्वारा देश के 4 शहरों में की जाती है. ये 4 शहर हैं मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा. हर जगह पर होने वाली मिंटिंग के लिए अलग निशान का प्रयोग किया जाता है. यानी ये निशान बताते हैं कि सिक्का (coins sign meaning) कहां पर बना था.

स्कूपव्हूप वेबसाइट और इंडिया कॉइन्स वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 1757 में कोलकाता मिंट (Kolkata mint) का निर्माण किया गया था. इस वजह से वहां किसी भी तरह के मार्क का इस्तेमाल नहीं किया जाता था क्योंकि मार्क लगाने की शुरुआत कुछ बाद में हुई थी. इसलिए जिन सिक्कों पर लिखे साल के नीचे कोई निशान नहीं होगा, वो कोलकाता में मिंट किया गया होगा.

 भारतीय करेंसी पर जितने भी निशान या साइन बने होते हैं उन सबका एक मतलब होता है जिनके बारे में लोगों को कम ही जानकारी होती है. आज हम नोट के बारे में नहीं, बल्कि भारतीय करेंसी के सिक्कों के बारे में आपको जानकारी देने जा रहे हैं. क्या कभी आपने सिक्कों पर बने अलग-अलग निशानों को गौर किया है. वो निशान सिक्के (dots on coins meaning) के बारे में एक खास चीज बताते हैं. सिक्कों के निर्माण को मिंटिंग कॉइन (minting of coins) कहते हैं. भारत में सिक्कों की मिंटिंग सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCI) के द्वारा देश के 4 शहरों में की जाती है. ये 4 शहर हैं मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और नोएडा. हर जगह पर होने वाली मिंटिंग के लिए अलग निशान का प्रयोग किया जाता है. यानी ये निशान बताते हैं कि सिक्का (coins sign meaning) कहां पर बना था. (फोटो: Canva/indian-coins.com)

भारत में मिंटिंग के लिए दूसरी जगह मुंबई (Mumbai Mint) में स्थापित की गई जो साल 1829 में शुरू की गई थी. यहां 3 अलग-अलग शेप का इस्तेमाल होता है. मुंबई में मिंट हुए सिक्कों पर डायमंड का आकार, अंग्रेजी अक्षर B और साल 1996 से बाद से अंग्रेजी अक्षर M का प्रयोग होता है.

साल 1903 में इसकी शुरुआत हुई जिसे हैदराबाद (Hyderabad mint) के निजाम ने शुरू किया था. यहां मिंट हुए सिक्कों की डेट के नीचे एक डायमंड होगा जिसके बीच में गड्ढा बना होगा. इसके अलावा हैदराबाद मिंट में दूसरा निशान स्टार यानी तारे का होता है.

  स्कूपव्हूप वेबसाइट और इंडिया कॉइन्स वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 1757 में कोलकाता मिंट (Kolkata mint) का निर्माण किया गया था. इस वजह से वहां किसी भी तरह के मार्क का इस्तेमाल नहीं किया जाता था क्योंकि मार्क लगाने की शुरुआत कुछ बाद में हुई थी. इसलिए जिन सिक्कों पर लिखे साल के नीचे कोई निशान नहीं होगा, वो कोलकाता में मिंट किया गया होगा. (फोटो: indian-coins.com)

नोएडा मिंट (Noida mint) की शुरुआत साल 1984 में हुई थी. यहां बने सिक्कों की तारीफ के नीचे गोल निशान बना बना होता है.

 कोरा वेबसाइट के अनुसार पहले के वक्त में ऐसा कई बार हुआ है जब भारत के पास इतने पैसे नहीं रहे हैं कि वो सिक्कों का निर्माण कर पाए. इस वजह से विदेशों में बने मिंट में कई बार सिक्कों का निर्माण करवाना पड़ा है जिसके निशान इस प्रकार होते हैं. (फोटो: Quora)

कोरा वेबसाइट के अनुसार पहले के वक्त में ऐसा कई बार हुआ है जब भारत के पास इतने पैसे नहीं रहे हैं कि वो सिक्कों का निर्माण कर पाए. इस वजह से विदेशों में बने मिंट में कई बार सिक्कों का निर्माण करवाना पड़ा है जिसके निशान इस प्रकार होते हैं. नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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