नमक के कारतूस दागकर करवाई जा रही बारिश | देखिए video

नमक के कारतूस दागकर करवाई जा रही बारिश | देखिए video

जैसा की आप है की किस तरह धीरे धीरे पीने का पानी धीरे धीरे कम होता जा रहा है। और आने वाले टाइम में एक समय ऐसा आएगा जब पीने का पानी बचेगा ही नहीं। हालाँकि हमारी सरकारे इस टॉपिक पर काम कर रही है। लेकिन सिर्फ सरकार से ये सब संभव नहीं है। पानी बचाने के लिए हम लोगो को भी कुछ करना होगा। तो आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे एक ऐसे इंसान के बारे में जो पानी को लेकर इस तरह से काम कर रहे है जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की होगी तो आइये जानते है।

ऐन्द्र स्मार्ट अपनी प्लेन में एक दिलचस्प सामान फिट कर रहे हैं सॉल्ट कार्ट्रिज। उन्हें उम्मीद है कि इससे बारिश होगी मार्ट बारिश करवातें हैं। और आज वो अपनी संभावनाओं को तौल रहे हैं। स्वीडन के रहने वाले मार्ट उड़ान भरने से पहले चीजों पर आखिरी नजर डालते हैं। अरब अमीरात के ऊपर बादलों से बारिश करवाने के लिए उनके पास तीन घंटे हैं। ये मुश्किल काम है मेरे जैसे इंसान के लिए क्लाउड सीडिंग का काम थोड़ा असामान्य है। क्योंकि यात्रियों की सुविधा के लिए अपने करियर में ज्यादातर समय मैंने बादलों से बचने की कोशीश की है। वहीं अब में बादल के भीतर तो नहीं, लेकिन उस के बिल्कुल किनारे प्लेन लेकर जाता हूँ। इसमें मुश्किल भी हो सकती है। रेगिस्तान से प्लेन उड़ाकर बादलों तक पहुंचना, जब सब धुंधला दिख रहा हो। और तापमान पैंतीस डिग्री सेल्सियस हो तो यह मिशन काफी महत्वाकांक्षी है। अमीरात में पानी की बहुत कमी है। लेकिन दुबई जैसे आलीशान शहरों में इसकी खपत बहुत ज्यादा है। यहाँ बहुत निर्माण कार्य होता है। और हर साल करीब आठ, लाख लोग तेल से संपन्न इस जगह पर बसने आते है।

बढ़ते तापमान और गिरते भूजल स्तर के बावजूद अमीरात में फसल उगाना और मुश्किल होता जा रहा है। पांच साल पहले रिटायर होते समय साला हल हमादी ने खेती में हाथ आज़माने का सोचा। तिरसठ साल के हल हमादी दुबई के बाहरी इलाके में अपने छोटे से खेत में अंजीर, अनार, मक्का और खजूर उगाते हैं। वो तीन सौ मीटर गहरे कुएं से पानी निकालते हैं। हर साल पानी का स्तर घटता जा रहा है। हल हमादी अपने फलों में एक दिन में ज्यादा से ज्यादा तीन घंटे पानी लगा सकते हैं। वो कहते हैं कि बहुत से फल गर्मी में झुलस जाते हैं। और बेचने लायक नहीं बचते। बारिश के लिए प्रार्थना करते हैं। पानी के लिए भगवन से विनती करते हैं। पानी के बिना इंसान कुछ नहीं कर सकता। अब्बू धाबी के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक समस्या का जमीनी समाधान खोजने पर काम कर रहे हैं। अहमद अलकमा ली मौसम से जुड़े ताजा आंकड़े टीम के आगे रखते हैं ,और अनुमान लगाते हैं कि कौन सा बादल कब और कहाँ पहुंचेगा ,ऐसा नहीं कि अमीरात के ऊपर बादल मंडराते हो ,लेकिन ज्यादातर बादल बारिश नहीं लाते ,अपनी चार प्रोपेलर विमानों की मदद से वैज्ञानिक सोडियम और पोटैशियम क्लोराइड बादलों में छोड़ते हैं ,नमक के अंश बादलों में मौजूद पानी से मिलकर भारी हो जाते हैं और बरस जाते हैं।

वैग्यानिकों के मुताबिक इसके कारण कहीं और बारिश में कमी नहीं आती। उनका कहना है कि इस तरीके के नतीजे उम्मीद जगाते हैं। हमने हाल ही में बारिश बढ़ाने पर एक शोध किया और पाया कि क्लाउड सीडिंग की वजह से यूएई में बारिश औसतन तेईस फीसदी बढ़ गई है। सबसे अच्छी स्थिती में बारिश पैंतीस फीसदी तक ज्यादा हो सकती है। खाड़ी के ऊपर आसमान में घने बादल जमा हो रहे हैं। अहमद अल कमा ली अंदर स्मार्ट से संपर्क करके उन्हें बादलों की लोकेशन बताते हैं। पायलट विमान लेकर बादलों की ओर बढ़ते हैं अब सब कुछ टाइम इन पर निर्भर करता है। एक ही समय पर कई चीजें करनी होती है।

आपको प्लेन उड़ाना है, बादलों के इर्द गिर्द विमान चलाना है। ताकि आप सही समय पर सही जगह मौजूद हो। साथ ही बादल बनने की वास्तविक स्थिती के मुताबिक प्लेन उड़ाने का भी ध्यान रखना होता है। निर्देश मिलने पर अंदर स्मार्ट चार राउंड दागते हैं। वो धीरे धीरे प्लेन की लोकेशन भी बदलते हैं। कंट्रोल रूम में मौसम विज्ञानी माार्ट के लिए बादलों की अगली लोकेशन खोज रहे हैं। तीन घंटे में वो करीब बीस क्लाउड सीडिंग कर चूके हैं। अक्सर इसके नतीजे तुरंत दिख जाते है। बारिश होने पर पूरी टीम खुश होती है।मुझे यकीन है कि ये तकनीक कारगर है। मैं ये नहीं कहता कि भविष्य में इससे बेहतर कोई तरीका खोजा नहीं जा सकता, लेकिन फिलहाल तो हम जो कर रहे हैं उस पर मुझे पूरा यकीन है। रेगिस्तान में बारिश वरदान समझी जाती है।

सलाह अलह मादी को बचपन से ही मौसम से जुड़ी चीजों में दिलचस्पी रही है। जब भी मुमकिन होता है वो बारिश के वीडियो बनाते हैं। वो धार्मिक हैं, लेकिन उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि भगवन की जगह इंसान बारिश करा रहे हैं। धार्मिक ग्रंथो में विज्ञान की मनाही नहीं है, बल्कि यह जरूरी है कि लोग ऐसी चीजें खोजे जिनसे इंसानों का फायदा हो। पहले लोग बादलों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे, लेकिन अब यह हमारी जरूरत बन गया है। हमें ज्यादा पानी हासिल करने के तरीके खोजने होंगे।आलोचकों के मुताबिक ये क्लाउड सीडिंग प्रोग्राम अवैज्ञानिक है। और इसकी सफलता प्रमाणित नहीं है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख इन आलोचनाओं को खारिज करते हैं। उनका यह भी कहना है कि समुद्र के पानी का खारापन मिटाने की प्रक्रिया इसके मुकाबले कहीं ज्यादा महंगी है। ये प्रोग्राम सफल है और हम बहुत सारे लोगों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हम वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन के संपर्क में हैं। इस प्रोग्राम से जुड़े ब्योरे उन्हें दिए जाएंगे। कई और देश भी हम से संपर्क कर रहे हैं। उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। ऐन्डर्स मार्ट विमान से बाहर आते हैं वो थक गए हैं लेकिन खुश हैं। उन्होंने चालीस काट इस दागे और चार बादलों की सीडिंग में कामयाबी मिली है। आज मैंने बारिश कराई, हाँ, मैं गर्व से ऐसा कह सकता हूँ। अंदर स्मार्ट की उड़ानें शायद जलवायु परिवर्तन को ना रोक पाए। और ना ही पानी की कमी दूर कर पाए लेकिन वो थोड़ी ज्यादा बारिश तो करा ही सकते हैं। जिसकी सबको जरूरत है। नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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