क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए? देखिए video

क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए? देखिए video

आपने भारत में कई शहरों में कूड़े के पहाड़ देखे होंगे. राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाके में तो ऐसे कूड़े के कई ढेर हैं जिन्हें खत्म करने की कोशिश जारी है. अब सोचिए कि अगर सिर्फ दिल्ली का ऐसा हाल है तो भारत के हर शहर से कितना कूड़ा निकलता होगा. पूरी एशिया से कितना निकलता है और पूरी धरती पर कितना कूड़ा होता होगा. धरती का सारा कूड़ा अगर मिला दिया जाए शायद एक पूरा शहर ही कूड़े से भर जाए. ऐसे में ये ख्याल आना लाजमी है कि धरती पर मौजूद ज्वालामुखी (why we cannot add garbage in lava) में दुनियाभर के कूड़े को डाल क्यों नहीं देते, जिससे वो मिनटों में राख बन जाए.

कचरे के निस्तारण के लिए एक खास तरीके का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है जिसे कूड़ा जलाने की प्रक्रिया (Incineration) कहते हैं. इसमें कूड़े को 1000-1200 डिग्री सेल्सियस तापमान पर जलता हैं जिससे वो राख बन जाता है. इसी तरह अगर वो सारा कचरा लावा में डाल दिया जाए तो क्या वो भी इनसिनिरेशन जैसी ही प्रक्रिया कहलाएगा?

हर ज्वालामुखी का एक जैसा नहीं होता तापमान

क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए?

आपको बता दें कि कई ज्वालामुखियों से जलने वाला लावा 1000 डिग्री सेल्सियस (temperature of volcano) के करीब होता है. ऐसे में अगर उसमें कूड़ा डाला जाता है तो वो कूड़ा जलाने (burning trash in volcano) की प्रक्रिया के समान ही होगा, मगर यही तापमान हर ज्वालामुखी का नहीं होता है. द कनवर्सेशन वेबसाइट की रिपोर्ट केअनुसार वॉशिंग्टन राज्य के माउंट सेंट हेलेन्स (Mount St. Helens) ज्वालामुखी से साल 2004-2008 में निकलने वाले लावा का तापमान करीब 700 डिग्री सेल्सियस था. वहीं किलाउइए Kilauea ज्वालामुखी से साल 2018 में निकलने वाले लावा का तापमान 1100 सेल्सियस के करीब था. इस कारण हर ज्वालामुखी में कूड़ा डालना उपयोगी नहीं होगा, क्योंकि कहीं पूरा कूड़ा जल जाएगा तो कहीं शायद आधा ही जले. पेपर प्लास्टिक, ग्लास जैसे मटीरियल तो जल जाएंगे पर स्टील, निकल, आयरन जैसे धातु से बने कचरे पूरी तरह से खत्म नहीं होगें.

ज्वालामुखी में कूड़ा डालने से हो सकता है विस्फोट

इसके अलावा एक और कारण है जिसके चलते लावा में कचरा डालने का ख्याल बेमतलब है. वो ये कि धरती पर वैसे तो कई ज्वालामुखी हैं मगर सिर्फ 8 ऐसे हैं जिनमें लावा का क्रेटर यानी कटोरे के आकार की जमीन में लावा का तालाब है. बिना लावा क्रेटर हुए कचरा उसमें नहीं डाला जा सकेगा. इसके बाद आता है सबसे प्रमुख कारण जो ये साफ बताता है कि लावा में कचरा डालना असंभव सा काम है. लावा के ऊपर ठंडी परत जमने लगती है मगर नीचे खौलता लावा होता है. ऐसे में अगर उसमें एक पत्थर भी डाला जाए तो भयंकर विस्फोट होने का खतरा होता है. तो अगर कई कचरा डालता है तो उसे तुरंत ही वहां से भाग निकलना पड़ेगा नहीं तो उसके ऊपर उड़ता हुआ लावा और जलता हुआ कचरा गिर सकता है.

लावा और कूड़ा मिलकर बनेगी जहरीली गैस

आपको बता दें कि लावा सल्फर, क्लोरीन, कार्बन डायऑक्साइड जैसी कई गैस निकलती हैं. अगर कूड़ा डाला जाएगा तो रिएक्शन होगा जिससे नई तरह की गैस भी निकलेगी जिसके चलते आसपास रहने वाले लोगों को सांस की समस्या हो सकती है और उस इलाके के जीव-जनतुओं को भी खतरा हो सकता है. आखिरी कारण ये है कि कई जगहों पर ज्वालामुखी को पवित्र माना जाता है, उन्हें भगवान से जोड़कर देखा जाता है तो उसमें कचड़ा डालना अशुभ होगा. नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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