गोल्ड मेडल जीतने के बाद खिलाड़ी उसको दांतो से क्यों काटते हैं ? देखिए video

गोल्ड मेडल जीतने के बाद खिलाड़ी उसको दांतो से क्यों काटते हैं ? देखिए video

टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) का आगाज होने में अब करीब एक सप्ताह का वक्त बचा है. सभी खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ खेलों के इस महाकुंभ में उतरेंगे और उनकी नजरें पदक पर लगी होंगी. चाहे कोई भी खेल हो, जब कोई स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतता है तो उसकी खुशी केवल खिलाड़ी को ही नहीं होती, बल्कि जिस देश का वह प्रतिनिधित्व करता है, उसको भी होती है. ऐसा आपने देखा होगा कि जब कोई खिलाड़ी स्वर्ण पदक जीतता है तो वह उसे अपने दांत से काटता (Why Athlete bite on medal) है. चाहे पुरुष हो या महिला, लेकिन ऐसी तस्वीरें जरूर नजर आती हैं जब खिलाड़ी मुंह में पदक दबाए हुए हो.

कभी पोडियम पर खुशी के आंसू नजर आते हैं तो कभी किसी को समर्पित उस मेडल की कहानी, लेकिन अकसर ऐसा देखा जाता है कि खिलाड़ी स्वर्ण पदक को दांतों में दबाए खड़ा होता है. इसके पीछे की वजह बेहद दिलचस्प है. इसका कारण है कि सोना अन्य धातुओं की तुलना में थोड़ा नरम और ज्यादा लचीला होता है. इसे एक तरीका भी कहा जा सकता है कि खिलाड़ी निर्धारित करते हैं कि पदक में असली सोना है या नहीं. अगर यह प्रामाणिक होता है तो आपके दांतों के निशान उस पदक पर नजर आएंगे. ज्यादातर पदक विजेता शायद पदक के प्रतीक के तौर पर ऐसा करते हैं. तैराकों से लेकर जूडो, जिमनास्ट तक सभी को पोडियम पर इस तरह की फोटो क्लिक कराते देखा जा सकता है.

खिलाड़ी स्वर्ण पदक जीतने पर उसे दांत से काटते हैं. (AFP)

इसके पीछे एक वजह और भी है कि यह फोटोग्राफरों के कहने पर भी किया जाने लगा है. वे इसे एक प्रतिष्ठित शॉट के रूप में देखते हैं. दरअसल, पहले गोल्ड मेडल सिर्फ गोल्ड प्लेटेड ही नहीं शुद्ध सोने का हुआ करता था. सोना एक बहुत ही नरम धातु है, दांतों के दबाने से, अगर यह शुद्ध है, इस पर काटने के निशान बन जाते थे. हालांकि बाद में पदक में सोने की मात्रा कम होने लगी. इस पर कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सोने की शुद्धता का पता लगाने के लिए ज्यादा जोर से काटने की जरूरत नहीं होती है.

अब इस इशारे का महत्व केवल प्रतीकात्मक है. कई एथलीटों ने इसे स्वीकार किया है कि पत्रकार और कैमरामैन भी उन्हें पदक को काटने वाला पोज देने के लिए कहते हैं. यह इतनी पुरानी प्रथा थी कि कई एथलीट वास्तव में जानते भी नहीं हैं कि इसे काटने के पीछे का कारण या असल वजह क्या है. वे वैसे ही करते हैं जैसे वे दूसरों को करते देखते हैं या जब पत्रकार या कैमरापर्सन उन्हें ऐसा करने के लिए कहते हैं. इतना ही नहीं, कुछ एथलीट तो अपना कांस्य पदक भी दांत से काटते नजर आते हैं. बता दें कि कांस्य थोड़ा ठोस पदार्थ में गिना जाता है और संभावना नहीं है कि कोई भी उस पर दांतों के काटने के निशान लग सकते हैं.नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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