इमोजी कहां से आई ? इमोजी की खोज किसने और कब की ? इमोजी का इतिहास ? देखिए video

इमोजी कहां से आई ? इमोजी की खोज किसने और कब की ? इमोजी का इतिहास ? देखिए video

आज के समय में अगर आपसे कोई इमोजी का मतलब पूछे तो शायद आप उस पर हंस देंगे। क्योंकि फेसबुक, व्हाट्सऐप या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आप बातचीत के दौरान जरूर ‘इमोजी’ का इस्तेमाल करते होंगे। तब तोे आप ये भी जानते होंगे कि दुनिया का सबसे पहला इमोजी एक ‘स्माइली’ था। ये सही है कि इमोजी से जुड़ी इतनी जानकारी बहुत से लोगों के पास मिल जाएगी, लेकिन अगर इससे आगे किसी ने उल्टा आपसे पूछ लिया तो आप क्या कहेंगे..? जैसे- ये स्माइली किसने और क्यों बनाया था..? इसकी खौज कैसे और कहां हुई ? है न… तो दोस्तों इससे पहले कोई आपसे ऐसे सवाल पूछे आज ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ के मौके पर इसकी गाथा जान ही लीजिए…

क्या है स्माइली..?

इमोजी

‘स्माइली’ या कहिए ‘इमोजी’ बात एक ही है… इनका इस्तेमाल आज के समय टैक्सट मैसेज से कहीं ज्यादा होने लगा है। आप भी शायद किसी से फोन पर चैटिंग के दौरान या सोशल मीडिया पर चैटिंग करते हुए इनका इस्तेमाल जरूर करते होंगे। हां, इसका असल असर आज की युवा पीढ़ी पर आपको देखने को मिल जाएगा।

जवान लड़के-लड़कियों से लेकर स्कूल गोइंग चाइल्ड तक बिना इमोजी इस्तेमाल के शायद ही आपस में बात करते मिलें। ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि मैसेज में इमोजी के जरिए अपनी भावनाओं को दूसरों को आसानी से समझा सकें। फिर चाहे वो रोना हो या फिर हंसना हो, गुस्सा हो या बुखार हो… आप बहुत ही आसानी से इमोजी के जरिए अपने दोस्तों को अपने मन की बात बता सकते हैं। जी हां, ये इमोजी रिएक्शन नोट कराने में बड़े काम आते हैं। कई बार बच्चे अपने मम्मी पापा से टैक्सट छुपाने के लिए भी इमोजी का इस्तेमाल कर आपस में बात करते हैं। ये उनके लिए कोडिंग लैंग्वेज बन जाते हैं।

जो इन्हें इस्तेमाल करता है वो अच्छी तरह से जानता है कि इमोजी के जरिए सामने वाले को ये आसानी से समझ में आ जाता है कि आपने उसकी बात पर कैसे रिएक्ट किया या फिर वो आपकी बात पर कोई इमोजी भेजता है तो आप भी उसके रिएक्शन को जान सकते हैं। लेकिन आपको ये बात नहीं मालूम होगी कि इमोजी की खौज कैस हुई और इसके पीछे क्या कारण था और इसकी बनाने वाला इंसान कौन था।

दुनिया में सबसे पहले स्माइली की खौज

world emoji day

दुनिया में सबसे पहले स्माइली फेस की बात करें तो इसे सबसे पहले अमेरिका में बनाया गया और इसके जन्मदाता यानी स्माइली को बनाने वाला पहला इंसान ‘हार्वी रोस बॉल’ था। अमेरीका में जन्मे हार्वी ने इस स्माइली फेस को जब तैयार किया था, तब उन्हें पता भी नहीं था कि यह इतना ज्यादा फेमस हो जाएगा। उन्होंने कभी इसे पेटेंट भी नहीं करवाया। अब आपको यह तो पता चल गया की यह किसने बनाया था, लेकिन इससे ज्यादा हैरानीभरा और रोचक आपके लिए ये जानना होगा कि इसे क्यों बनाया गया था।

…तो इसलिए बनाया गया था सबसे पहला स्माइली

इमोजी

चलिए अब आपको यह भी बता देते हैं कि यह क्यों बनाया गया। दरअसल हार्वी 1963 में एक एडवरटाइजिंग और पीआर एजेंसी चलाते थे। इसी दौरान स्टेट म्युचुअल लाइफ एश्योरेंस कंपनी ऑफ अमेरिका उनके सामने अपनी एक परेशानी लेकर पहुंची। उस दौरान इस कंपनी ने किसी दूसरी कंपनी के साथ विलय कर लिया था। इससे कंपनी के कर्मचारी बेहद नाराज थे। हार्वी ने इस समस्या का समाधान करने के लिए ‘स्माइली फेस’ तैयार किया। उन्हें इसे तैयार करने के लिए 45 डॉलर मिले।

रूठे कर्मचारियों को मनाने के लिए हुआ इस्तेमाल

जो आज के हिसाब से तकरीबन 3 हजार रुपए हैं। पीले रंग का ये हंसता हुआ चेहरा रूठे कर्मचारियों को मनाने के लिए बनाया गया था। बाद में यह स्माइली फेस इतना पसंद किया गया कि देखते ही देखते यह पूरी दुनिया में फैल गया। साल 1971 में 5 करोड़ स्माइली फेस बटन छपे और बेचे गए। यही नहीं 1999 में तो यूएस पोस्टल सर्विस डिपार्टमेंट ने स्माइली फेस स्टांप भी जारी किया गया। आज यही स्माइली कई जगह फैल गया हैं। इमोजी स्माइली की टी-शर्ट भी बाजार में देखी जाती हैं। स्माइली की गेंद भी आपने देखी होगी। लोग काफी ज्यादा इसको पसंद भी करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि बीते साल ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ के मौके पर ही फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक के जरिए दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले इमोजी कि जानकारी अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर की थी। इसमें फर्स्ट पोजिशन पर टीअर्स ऑफ जॉय फेस वाला इमोजी था। ये रोचक बात हम में से बहुत कम लोगों को पता होगी, क्योंकि हर साल की तरह 17 जुलाई को आने वाला ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ आता है और बस यूं ही चला जाता है। जानकारियों के अभाव में इस दिन को सेलिब्रेट करने का हम एक बेहतर मौका हाथ से छोड़ देते हैं। लेकिन यही इमोजी हमारे साथ चैट बॉक्स में हमेशा बना रहता है। इसलिए इसकी जानकारी होना हमारे लिए जरूरी है। नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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