आखिर चीन मुसलमानो से इतनी नफरत क्यों करता है ?

आखिर चीन मुसलमानो से इतनी नफरत क्यों करता है ?

चीन (Mainland China) का झिनझियांग प्रांत पाकिस्तान (Pakistan) की तुलना में डेढ़ गुना और बांग्लादेश (Bangladesh) से 12 गुना ज़्यादा बड़ा है और यहां की करीब आधी आबादी उइगर मुसलमानों (Uyghurs) की है. बाकी आधे हान वंश के चीनी हैं. हालांकि 1949 तक यहां 90 फीसदी आबादी तुर्की मूल के मुसलमानों की थी और सिर्फ 4 फीसदी हान वंशी थे. पिछले करीब 70 सालों से यहां उइगरों का दमन बदस्तूर जारी है और अब ये हाल है कि यहां उइगर मुसलमान एक तरह से कैदी हैं.

चीन आधिकारिक तौर पर मानता है कि झिनझियांग में उइगरों की आबादी 1.2 करोड़ तक है, जबकि उइगरों का कहना है कि चीन उनकी संख्या कम ज़ाहिर करता है और उनकी आबादी 2 करोड़ तक है. उइगर कांग्रेस 3 और कुछ समूह साढ़े 3 करोड़ की आबादी के दावे भी करते हैं, लेकिन प्रमाण नहीं देते. बहरहाल, अब दो सवाल खड़े होते हैं. पहला, चीन क्यों लगातार इन्हें कुचल रहा है? दूसरा, मुस्लिम देशों की बड़ी दुनिया चीन के खिलाफ चुप क्यों है?

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ताज़ा रिपोर्ट्स की मानेंतो चीन के झिनझियांग में उइगरों की मस्जिदों को तोड़कर वहां टॉयलेट या शराब दुकानों जैसे निर्माण किए जा रहे हैं. उइगरों की बड़ी आबादी के साथ ही चीन में बसे करीब 30 लाख कज़ाकियों, किर्गियों और तुर्कियों की आबादी को भी चीन बंदी शिविरों में रखकर प्रताड़ित करता है. उइगरों को बरसों से दी जा रही प्रताड़नाओं पर रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं. सिलसिलेवार उइगरों पर चीन की ज़्यादतियों को समझना ज़रूरी है.

कौन हैं उइगर मुसलमान?

मूलत: तुर्की से ताल्लुक रखने वाले इस समुदाय का रिश्ता इतिहास के मुताबिक एशियाई देशों के साथ रहा. यों तो उइगरों की आबादी किर्गिस्तान, कजाकस्तान और उजबेकिस्तान में भी है, लेकिन सबसे ज़्यादा उइगर चीन के झिनझियांग प्रांत में ही हैं. इस प्रांत को उइगरिस्तान या पूर्वी तुर्किस्तान भी कहा जाता है. इस प्रांत के कई हिस्से ऐतिहासिक ‘सिल्क रूट’ में शामिल रहे हैं. 1949 में कम्युनिस्ट चीन ने यहां पूरा नियंत्रण हासिल करने के बाद से दमनकारी नीतियां शुरू कीं.

तिब्बत की तरह ही उइगर बहुल यह प्रांत खुद को स्वशासी मानता रहा है, लेकिन चीन इस इलाके पर पूरा नियंत्रण रखता है. उइगरों के खिलाफ चीन के दमनकारी रवैये को ज़ाहिर करती रिपोर्ट्सये भी कहती हैं कि मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिन के कार्यकाल में ये दमन बहुत ज़्यादा बढ़ा है.

झिनझियांग में क्या है चीन की करतूत?

उइगरों से यहां धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आज़ादी छीनी जा रही है. पिछले करीब दो दशकों से इस प्रांत में चीन का दमन बेहद बढ़ चुका है. रिपोर्ट्स की मानें तो रमज़ान में रोज़ा रखने पर प्रतिबंध हैं, कुछ स्थानों पर मस्जिदों में नमाज़ नहीं पढ़ने दी जा रही और तो और दाढ़ी रखने, बुर्का पहनने और त्योहार मनाने की इजाज़त तक नहीं है.

मुस्लिम दुनिया खामोश कैसे?

भारत में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ महीनों तक विरोध प्रदर्शन होते हैं या पैगंबर मोहम्मद के कार्टून के विरोध में एक अखबार के पेरिस स्थित दफ्तर पर हमला होता है या म्यांमार से रोहिंग्याओं के बेदखल होने पर हाहाकार मचता है और दुनिया के तकरीबन हर कोने में इस्लाम पर ज़रा सी आंच आने पर बवाल होता है. लेकिन चीन के खिलाफ दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी यानी मुस्लिम देशों का रवैया हैरान करता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में 18 लाख उइगर मुसलमान कैद में हैं, 10 लाख मुसलमानों को बंदी कैंपों में में रखा गया है और इनसे बंधुआ मज़दूरों की तरह काम लिया जाता है. पिछले तीन सालों में 10 से 15 हज़ार मस्जिदें झिनझियांग प्रांत में नष्ट की जा चुकी हैं. भारत और चार मुस्लिम देशों के साथ सीमा साझा करने वाले झिनझियांग में चीन की इस क्रूरता पर चुप्पी का आलम देखिए.

* उइगरों के मामले में संयुक्त राष्ट्र ने भी चीन की आलोचना से परहेज़ ही किया.
* खुद को इस्लामी देशों का अगुआ बताने वाला सऊदी अरब आज तक इस मुद्दे पर चुप रहा है.
* इस्लामी दुनिया में सऊदी अरब का विकल्प बनने का इच्छुक तुर्की तो उइगरों को चीन भेज देता है, अगर वो उसकी ज़मीन पर आ जाएं.
* पाकिस्तान उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर अनजान बना रहता है.
* पाक का साथ देने और कश्मीर मुद्दे पर भारत का विरोध करने वाला मलेशिया कभी उइगरों के लिए चीन के खिलाफ नहीं बोला.
* ईरान ने यहां तक कह दिया कि उइगरों के दमन से चीन इस्लाम की सेवा ही कर रहा है.

इस रवैये के पीछे रहस्य? चीन का डर?

दुनिया के ज़्यादातर मुस्लिम देश अन्य संपन्न देशों की आर्थिक मदद के मोहताज हैं या फिर अहम कारोबारी रिश्ते रखते हैं. दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट यानी ‘एक बेल्ट एक रोड’ चीन की महत्वाकांक्षा है और इसमें 30 मुस्लिम देश शामिल हैं. इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान में 4.47 लाख करोड़, सऊदी अरब में 5.20 लाख करोड़, ईरान में 29 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश किए हैं, जो इन देशों की बोलती बंद रखने के लिए काफी हैं.

क्यों उइगरों का दमन कर रहा है चीन?

इस पूरे ब्योरे को पढ़कर आप समझ चुके हैं कि विस्तारवादी नीतियों के तहत बौखलाया चीन हर ज़मीन को कब्ज़े में ले लेने के लिए बेताब है. तिब्बत, हांगकांग और ताइवान पर जिस तरह चीन दावों के बाद उन पर अपना अधिकार जमा चुका है, उसी तर्ज़ पर पूर्वी तुर्किस्तान को लाख विरोध के बावजूद झिनझियांग बनाया जा चुका है. यहां बीजिंग की शह पर मेनलैंड चीन के समूह योजनाबद्ध ढंग से दमन में जुटे हैं.

दूसरी तरफ, उइगरों और अल्पसंख्यकों पर ज़्यादतियों और जाति संहार के आरोपों को चीन नकारता रहा है. चीन का आरोप है कि उइगर उसकी सत्ता के खिलाफ साज़िश कर आतंकी हमले करने की फिराक में रहते हैं. चूंकि दशकों से दमन झेल रहे उइगरों के कुछ समूहों ने हिंसा की भी है तो चीन इन कुछ तथ्यों की आड़ में लाखों बल्कि एक करोड़ से ज़्यादा की आबादी को आतंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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