car की number plate पर यह stamped क्यों ? देखिए video

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आपने देश की सभी गाड़ियों के पीछे एक खास तरह की नंबर प्लेट को देखा होगा। इन नंबर प्लेटों में कुछ खास संख्याओं के साथ-साथ DL, BH और UK जैसे लेटर लिखे होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन लेटरर्स और नंबरों का क्या मतलब होता है और किन आधारों पर ये वाहनों को दी जाती हैं और इसे जारी कौन करता है? अगर नहीं सोचा तो सोचिए और इस लेख के माध्यम से जानिए कि क्या अर्थ है नंबर प्लेट की इन खास नंबरों और लेटरों का।

क्यों जारी की जाती है नंबर प्लेट?

मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार भारत में सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी वाहन को तब तक नहीं चलाया जा सकता जब तक वाहन का पंजीकरण ना कराया गया हो। सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए सबसे जरूरी है उसका रजिस्ट्रेशन कराना। जब किसी वाहन की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो जाती है तब उसे एक नंबर प्लेट दे दी जाती है जिसे ऑफिशियल नंबर प्लेट के रूप में जाना जाता है। किसी वाहन को दी गई नंबर प्लेट यूनिक होती है यानी देश में अन्य किसी को समान कैरेक्टर वाली नंबर प्लेट नहीं दी जाती।

कैसे तय होता है नंबर प्लेट का प्रारूप?

किसी भी वाहन के नंबर प्लेट के कैरेक्टर्स को चार आधारों पर तैयार किया जाता है। ये आधार हैं- राज्य/केंद्रशासित प्रदेश, जिला,वाहन का यूनिक नंबर और IND चिन्ह। आइए एक-एक कर के सभी विषयों में जानते हैं।

आधार 1 राज्य- नबंर प्लेट बनाते समय वाहन नंबर प्लेट का पहला भाग उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को इंगित करता है जिसमें मोटर वाहन रजिस्टर किया गया है। उदाहरण के लिए अगर वाहन दिल्ली में पंजीकृत है तो वाहन नंबर प्लेट के पहले दो अक्षर ‘DL’ होंगे। 1980 के दशक से ही नंबर प्लेट में राज्य को दर्शाने का यह तरीका शुरु हुआ था।

आधार 2 जिला- नंबर प्लेट के अगले दो अंक उस जिले को चिन्हित करते हैं जिसमें वाहन रजिस्टर किया गया था। एक राज्य में प्रत्येक जिले को अपनी अनुक्रमिक यानी सीक्वेंशियल संख्या सौंपी जाती है। यही कारण है कि सरकार ने देश के हर जिले में रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) की स्थापना की है। आवेदक के निवास जिले में RTO मोटर वाहन के पंजीकरण के लिए जिम्मेदार है।

आधार 3 वाहन का यूनिक नंबर- नंबर प्लेट का यह आधार इसे यूनिक या बाकी प्लेटों से अलग बनाता है। यदि असाइन करने के लिए कोई यूनिक संख्या नहीं बची है तो रजिस्ट्रेशन प्राधिकारी द्वारा लास्ट अंक को बदलने के लिए लेटरों का प्रयोग किया जाता है। कस्टम मेड वाहन नंबर प्लेट प्राप्त करने के लिए आवेदक को एक बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है।

आधार 4 IND चिन्ह- वाहन की नंबर प्लेट का चौथा भाग एक अंडाकार चिन्ह होता है जिसमें ‘IND’ अक्षर यह दर्शाने के लिए लिखे जाते हैं कि वाहन भारत में पंजीकृत है। HSRP को 2005 में वाहनों की चोरी को कम करने के लिए पेश किया गया था। हालांकि सरकार द्वारा उच्च सुरक्षा वाले वाहनों के लिए क्रोमियम होलोग्राम को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन अभी भी इसे कई राज्यों में लागू नहीं किया गया है। नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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