अमेरिका का Secret Weapon, जो सब पर भारी है देखिये video

अमेरिका रक्षा विभाग पेंटागन ने एक नए हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण की जानकारी दी है. अगले साल तक पेंटागन हाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती पर काम कर रहा है.अमेरिकी सेना ने एक नए हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण की घोषणा की है. रक्षा विभाग पेंटागन के अधिकारी चीन और रूस की अत्याधुनिक मिसाइल शक्ति के बराबर या फिर उससे आगे निकलना चाहते हैं. अमेरिका की डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी का कहना है कि उसने हाल ही में हवाई जहाज से दागी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया जो मैक 5 यानी ध्वनि से 5 गुना तेज गति से उड़ान भरने में कामयाब हुआ. मिसाइल 65 हजार फीट की ऊंचाई तक गई और इसने करीब 300 नॉटिकल मील की दूरी तय की.

अमेरिका का हाइपरसोनिक मिसाइल

डीएआरपी हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास के लिए एचडब्ल्यूएसी यानी हाइपरसोनिक एयर ब्रीदिंग वेपन कॉन्सेप्ट कार्यक्रम चला रही है. इस बार का मिसाइल इससे पहले के मिसाइल से अलग था जिसका परीक्षण बीते सितंबर में हुआ था. अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन का कहना है कि यह परीक्षण मार्च के मध्य में ही हो गया था. यूक्रेन युद्ध को देखते हुए मिसाइल परीक्षण की खबर से तनाव और ना बढ़ जाए इसलिए तब इसकी घोषणा नहीं की गई.मार्च 2020मेंअमेरिकी सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से कई हाइपरसोनिक मिसाइलों के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया था. डीएआरपीए का कहना है कि हाइरपसोनिक मिसाइलें वातावरण में मौजूद हवा का इस्तेमालकरप्रोपल्शनकोबनाएरखतीहैं.एचडब्ल्यूएसी के प्रोग्राम मैनेजर एंड्रयू नोएडलर का कहना है, “लॉकहीड मार्टिन के एचएडब्ल्यूसी फ्लाइट टेस्ट ने दिखाया है कि युद्ध क्षेत्र में दबदबा कायम करने के लिए हमारे दूसरे डिजायन में सही क्षमताओंको चुना गया है.”पेंटागन ने2023 के लिए बजट के अनुरोध में पहले से ही 4.7 अरब डॉलर का फंड हाइपरसोनिक हथियारों के शोध और विकास के लिए मांगा है. इसमें अगले साल तक हाइपरसोनिक मिसाइल की तैनाती की बात है. इसके साथ ही 2025तकसागरसेदागीजानेवाली और 2025 तक हवा से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइल तैनात करने की योजना पर काम चल रहा है.

2011 में अमेरिका ने प्रशांत महासागर में हवाई जहाज से दागी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था.

हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में आगे है रूस

अमेरिका, रूस, भारत, कोरिया और चीन समेत कई देश हाइपरसोनिक मिसाइलों को विकसित करने पर काम कर रहे हैं. रूस इस मामले में सबसे आगे है. यूरोपमेंमौजूदअमेरिकीकमांडरोंकाकहनाहैकियूक्रेनयुद्धमेंभीउसनेहाइपरसोनिक मिसाइल का कई बार प्रयोग किया है. हाइपरसोनिक मिसाइलों की गति इतनी तेज होती है कि उन्हें मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम के सहारे पकड़ पाना संभव नहीं है. बीते साल पतझड़ के मौसम में जब रूस ने बड़ीसंख्यामेंहाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती यूक्रेन की सीमा पर दी थी तभी से अमेरिका यूक्रेन पर हमले की आशंका जता रहा था.बीते साल अक्टूबर में अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल मार्क मिले ने चीन में हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण की पुष्टि की थी. ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में मिले ने चीन के परीक्षण को “हाइपरसोनिक वेपन सिस्टम के परीक्षण की एक अहम घटना और बेहद चिंताजनक” बताया था.
दुनिया के लिए खतरा हैंं हाइपरसोनिक मिसाइले

2011 में इस इपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था

रूसी राष्ट्रपति ने और अधिक विकसित हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने का हुक्म दिया है. रूसी सेना का कहना है कि उनका अवांगार्ड सिस्टम ध्वनि की गति से 27 गुना ज्यादा गति से उड़ान भर सकता है और इतना ही नहीं यह दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए तीखे मोड़ों वाले घुमाव भरे रास्तों पर भी चल सकता है. उड़ान भरने के बाद भी इसका रास्ता बदला जा सकता है.रूस ने इसे सोवियत जमाने के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल में फिट किया और इसके साथ पहली यूनिट को दिसंबर 2019 में लैस किया गया था. दो हफ्ते पहले रूसी सेना ने बताया था कि उसने यूक्रेन में दो हाइपरसोनिक मिसाइलें दागी हैं.हाइपरसोनिक मिसाइलें वैश्विक सैन्य संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा हैं. यह बहुत सटीकता से परमाणु हथियारों को अपने तय लक्ष्यों तक ले जा कर तबाही मचा सकती हैं. इनकी गति इतनी तेज है कि रास्ते में रोक कर इन्हें खत्म कर पाना लगभग नामुमकिन है.चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल बना लेने के बाद अमेरिका खासतौर से इस मामले में बहुत दबाव महसूस कर रहा है. पिछले साल चीन ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया वह पूरी दुनिया में मार कर सकता है.नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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