अगर प्लेन उड़ाते समय पायलेट सो जाये तो क्या होगा? देखिए video

अगर प्लेन उड़ाते समय पायलेट सो जाये तो क्या होगा? देखिए video

अगर प्लेन चलाते समय पायलेट सो जाये तो क्या होगा?

अगर प्लेन चलाते समय पायलेट सो जाये तो प्लेन क्रैश नही होगा, क्युकी प्लेन में EICAS (इंजन इंडिकेटिंग एंड क्रू अलर्ट सिस्टम) सिस्टम होता है जो पायलेट की हर एक्टिविटी को नोट करता है, तो ऐसे में मान लो अगर पायलेट सो गया है और वो प्लेन की किसी भी कंट्रोलिंग डिवाइस को नही छू रहा है तो एक निश्चित समय के बाद ये सिस्टम पायलेट के पास एक रेस्पोंस वार्निंग भेज देता है जिसे रोकने के लिए पायलेट कोई भी बटन दबा सकता है लेकिन अगर पायलेट सो रहा होगा तो वो कोई बटन नही दबाएगा

जिससे इस सिस्टम को ऑटोमेटिक ही पता चल जाता है कि पायलेट सो रहा है इसीलिए कुछ समय बाद ये सिस्टम अलर्ट हॉर्न को तेजी से बजाने लगता है इसकी आवाज इतनी तेज होती है कि पायलेट को नींद से उठना ही पड़ता है. अगर कोई पायलेट जागते हुए नींद में रहता है ये फिर किसी तरह की लापरवाही कर जाये तो ये बहुत ही खतरनाक होता है इस तरह का एक हादशा एक बार इंडिया में हुआ था.

22 मई 2010 को एयर इंडिया की फ्लाइट 812 दुबई से बैंगलोर की ओर जा रही थी जिसमे 152 यात्री और 6 क्रू मेम्बर्स थे उस प्लेन में ज्यादातर भारत के गरीब मजदूर थे जो दुबई काम करने गये थे और अब वापस अपने परिवार से मिलने आ रहे थे. इस प्लेन के एक पायलेट का नाम जिअटको ग्लुसिका और दूसरे पायलेट का नाम हरविंदर सिंह था. ये जहाज जब दुबई से उड़ा तो सब कुछ नार्मल था लेकिन जब जहाज ने अपना पूरा रास्ता तय कर लिया और बंगलौर के एअरपोर्ट में उतरने लगा तो ये जहाज रनवे पर नही रुका और जाकर रनवे के पास मौजूद पहाड़ से टकरा गया और जहाज में आग लग गयी और इस प्लेन क्रैश में 158 लोग मारे गये.

जब जहाज का ब्लैक बॉक्स डिस्कवर किया गया तो दोनों पायलेट के बीच में होने वाली बातें सामने आई, जिससे ये पता चला कि प्लेन उड़ाते समय प्लेन का पायलेट जिअटको सो गया था इसके घराटे की आवाज ब्लैक बॉक्स में साफ-साफ सुनाई दे रही थी, ये इतना नींद में था कि जहाज को सही से लैंड नही कर पाया और जहाज रनवे पर न रुक कर पहाड़ से जाकर टकरा गया. जहाज का दूसरा पायलेट हरविंदर सिंह उसे आवाज दे रहा था लेकिन फिर भी वो काफी नींद में था.

हवाई जहाज को रास्ता कैसे पता चलता है?

आप में से बहुत लोग ऐसा सोचते हैं कि हवाई जहाज कही से भी आ या जा सकता है लेकिन नही, हवाई जहाज के चलने के लिए भी एक रास्ता होता है. इन रास्तो को देखने के लिए पायलेट रेडियो रेडार सिस्टम का यूज करते हैं इसके अलावा एयर ट्रैफिक कंट्रोलर भी होते हैं जो पायलेट को ये बताते है कि हवाई जहाज को कितनी ऊंचाई पर उड़ाना है ये रास्ता एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रेंज में होता है जिससे जो भी प्लेन जिस रास्ते पर जाये उसका पता चलता रहे और दो प्लेन आपस में टकराए नही.

पहले के समय में प्लेन उड़ाने के लिए पायलेट पहाड़, घर, जमीन, रेलवे लाइन को देख कर रास्ता बनाते थे लेकिन उसके बाद अमेरिका ने तीरों का यूज करना शुरू कर दिया था जमीन पर बने ये तीर इतने बड़े होते थे कि आकाश से भी इन्हें देखा जा सके. लेकिन ये तीर रात में नही दिखाई देते थे इसीलिए इन तीरों के पास में लाइट लगा दी गयी, कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा, उसके बाद रेडियो रेडार सिस्टम का यूज करना शुरू कर दिया गया जो आज भी यूज किया जा रहा है. ये सबसे सुरक्षित भी माना जाता है.नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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