600 KM प्रति घंटे की स्पीड से चलती है ये ट्रेन,हवाई जहाज को छोड़ देती है पीछे । देखिए video

600 KM प्रति घंटे की स्पीड से चलती है ये ट्रेन,हवाई जहाज को छोड़ देती है पीछे । देखिए video

यह ट्रेन पटरियों की बजाय हवा (Magnetic Field) में चलती है, सो इसमें एनर्जी भी बहुत कम खर्च होती है. बीएचईएल (BHEL) ने इसे भारत लाने के लिए स्विटजरलैंड की कंपनी SwissRapide AG के साथ हाथ मिलाया है.

भारत में हाई स्पीड ट्रेनों का नया युग शुरू हो चुका है. देशभर में रेलवे ट्रैक्स को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि अलग-अलग रूट्स में हाई स्पीड ट्रेनें चलाईं जा सके. देश में अभी जो वंदे भारत एक्सप्रेस चलती है, उसकी अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटे है. वहीं 160 की रफ्तार से दौड़ने वाली गतिमान एक्सप्रेस, 150 की रफ्तार वाली शताब्दी एक्सप्रेस और 140 की रफ्तार वाली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें भी मौजूद हैं. लेकिन सोचिए कि 600 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन आ जाएगी तो क्या होगा!

हम बात कर रहे हैं हाई स्पीड मैग्लेव ट्रेन की. भारत में इसे लाने के लिए स्विस कंपनी से करार हुआ है. हालांकि इसमें अभी बहुत देर है. फिलहाल बात करेंगे चीन(China) की. चीन में करीब 2 महीने पहले सबसे तेज दौड़ने वाली मैग्लेव ट्रेन की शुरुआत कर दी है. इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 620 किमी प्रति घंटा है. चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ का दावा है कि यह दुनिया की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेन है. इस ट्रेन में 10 डिब्बे लगाए जा सकते हैं और प्रत्येक में 100 यात्री बैठ सकते हैं.

हम बात कर रहे हैं हाई स्पीड मैग्लेव ट्रेन की. भारत में इसे लाने के लिए स्विस कंपनी से करार हुआ है. हालांकि इसमें अभी बहुत देर है. फिलहाल बात करेंगे चीन(China) की. चीन में करीब 2 महीने पहले सबसे तेज दौड़ने वाली मैग्लेव ट्रेन की शुरुआत कर दी है. इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 620 किमी प्रति घंटा है. चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ का दावा है कि यह दुनिया की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेन है. इस ट्रेन में 10 डिब्बे लगाए जा सकते हैं और प्रत्येक में 100 यात्री बैठ सकते हैं.

चीन लंबे समय से मैग्लेव ट्रेनों का संचालन कर रहा है. हालांकि पहले से संचालित ट्रेनों की स्पीड इतनी ज्यादा नहीं है. अक्टूबर 2016 में हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत करने वाले चीन ने वर्ष 2019 में 600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली इस ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया था. फिर जून 2020 में किया गया ट्रायल सफल रहा और जुलाई 2021 में तटीय शहर किंगदाओ से यह सेवा पब्लिक को समर्पित कर दी गई.

चीन लंबे समय से मैग्लेव ट्रेनों का संचालन कर रहा है. हालांकि पहले से संचालित ट्रेनों की स्पीड इतनी ज्यादा नहीं है. अक्टूबर 2016 में हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत करने वाले चीन ने वर्ष 2019 में 600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली इस ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया था. फिर जून 2020 में किया गया ट्रायल सफल रहा और जुलाई 2021 में तटीय शहर किंगदाओ से यह सेवा पब्लिक को समर्पित कर दी गई.

ट्रेन की तकनीक की बात करें तो यह मैग्लेव यानी मैगनेटिक लेविटेशन आधारित ट्रेन है. इस हाई स्पीड ट्रेन को दौड़ने के लिए न तो पहिये की जरूरत है, न एक्सल-बियरिंग वगैरह की. सामान्य ट्रेनों की तरह मैग्लेव ट्रेन के पहिये रेल ट्रैक के संपर्क में नहीं आते हैं. यह ट्रेन हाई टेंपरेचर सुपरकंडक्टिंग पावर पर चलती है. इससे ऐसा लगता है ​कि चुंबकीय ट्रैक्स पर ट्रेन तैर रही है.

ट्रेन की तकनीक की बात करें तो यह मैग्लेव यानी मैगनेटिक लेविटेशन आधारित ट्रेन है. इस हाई स्पीड ट्रेन को दौड़ने के लिए न तो पहिये की जरूरत है, न एक्सल-बियरिंग वगैरह की. सामान्य ट्रेनों की तरह मैग्लेव ट्रेन के पहिये रेल ट्रैक के संपर्क में नहीं आते हैं. यह ट्रेन हाई टेंपरेचर सुपरकंडक्टिंग पावर पर चलती है. इससे ऐसा लगता है ​कि चुंबकीय ट्रैक्स पर ट्रेन तैर रही है.

भारत, जापान और जर्मनी जैसे देश भी अपने यहां मैग्लेव ट्रेन चलाने की तैयारी में हैं. चूंकि यह ट्रेन पटरियों की बजाय हवा (Magnetic Field) में चलती है, सो इसमें एनर्जी भी बहुत कम खर्च होती है. देश की सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी बीएचईएल (BHEL) ने इसे भारत लाने के लिए स्विटजरलैंड की कंपनी SwissRapide AG के साथ हाथ मिलाया है, जिसे Maglev Rail Projects में स्पेशलाइजेशन हासिल है. बता दें कि BHEL पिछले 5 दशक से रेलवे के डेवलपमेंट में अपनी भूमिका निभा रहा है.नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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