एशिया के छोटे से मुस्लिम देश ने कैसे भारत को पछाड़ा?

एशिया के छोटे से मुस्लिम देश ने कैसे भारत को पछाड़ा?

इतना कुछ होने के बावजूद बांग्लादेश अपनी आर्थिक सफलता की नई इबारत लिख रहा है. हालांकि बांग्लादेश की इस सफलता की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस रूप में नहीं हुई. मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में बांग्लादेश तेज़ी से प्रगति कर रहा है. कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. हाल के एक दशक में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था औसत 6 फ़ीसदी की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है. साल 2018 जून महीने में यह वृद्धि दर 7.86 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी.

1974 में भयानक अकाल के बाद 16.6 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला बांग्लादेश खाद्य उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है. 2009 से बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुनी हो गई है.इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोग ग़रीबी में जीवन बसर कर रहे हैं लेकिन विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 1.25 डॉलर में अपना जीवन चलाने वाले कुल 19 फ़ीसदी लोग थे जो अब 9 फ़ीसदी ही रह गए हैं.

शेख़ हसीना लगातार तीसरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं. हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश हाल के वर्षों में एशिया के सबसे सफल देशों में से एक उभरकर सामने आया है. एक वक़्त था जब बांग्लादेश (उस वक़्त उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) पाकिस्तान का सबसे ग़रीब इलाक़ा था. 1971 में आज़ादी के बाद भी बांग्लादेश भीषण ग़रीबी में रहा. 2006 के बाद से बांग्लादेश की तस्वीर से धूल छंटने लगी और तरक़्क़ी की रेस में पाकिस्तान से आगे निकल गया.

‘विकास दर में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ देगा’

बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई. जाने-माने अर्थशास्त्री कौशिक बासु का कहना है कि बांग्लादेश विकास दर में भारत को भी पीछे छोड़ देगा.बांग्लादेश की आबादी 1.1 फ़ीसदी दर से प्रति वर्ष बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की दो फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है. इसका मतलब यह भी है कि पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय भी तेज़ी से बढ़ रही है.

कहा जा रहा है कि बांग्लादेश बड़े शांत तरीक़े से अपना कायापलट कर रहा है. कौशिक बसु का मानना है कि बांग्लादेश के समाज के बड़े हिस्से में बदलाव की बयार है और यहां महिलाओं का सशक्तीकरण भी तेज़ी से हो रहा है. बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है.विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजीटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

भारत में ऐसे लोगों की तादाद 48 फ़ीसदी है जिनके पास बैंक खाता तो है लेकिन उससे कोई लेन-देन नहीं करते. ऐसे खातों को डॉर्मन्ट अकाउंट (निष्क्रिय खाता) कहा जाता है. दूसरी तरफ़ बांग्लादेश में ऐसे लोग 10.4 फ़ीसदी लोग ही हैं. इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के लिए वो पल काफ़ी निर्णायक रहा जब संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश को अल्पविकसित देश की श्रेणी से निकाल 2024 में विकासशील देशों की पंक्ति में खड़ा करने की बात कही. प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश के लिए यह एक बड़ी उपल्बधि होगी.

संयुक्त राष्ट्र की इस पहल पर शेख हसीना ने एक इंटरव्यू में कहा था, ”अल्पविकसित श्रेणी से बाहर निकलना हमारे आत्मविश्वास और उम्मीदों की मज़बूती के लिए बहुत ख़ास है. यह न केवल नेताओं के लिए बल्कि यहां के नागरिकों के लिए भी अच्छा है. अगर आप निचले दर्जे में रहते हैं तो प्रोजेक्ट और प्रोग्राम पर बातचीत भी उन्हीं की शर्तों के हिसाब से होती है. ऐसे में आप दूसरों की दया पर ज़्यादा निर्भर करते हैं. एक बार जब आप उस श्रेणी से बाहर निकल जाते हैं तो किसी दया की नहीं बल्कि अपनी क्षमता के दम पर आगे बढ़ते हैं.”

हसीना मानती हैं कि बांग्लादेश की मज़बूत वृद्धि दर न केवल जारी रहेगी बल्कि इसमें तेज़ी भी आएगी. एशियन निक्केई रिव्यू को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा है, ”अगले पाँच सालों में हमलोग उम्मीद करते हैं कि वृद्धि दर 9 फ़ीसदी रहेगी और 2021 में 10 फ़ीसदी तक जाएगी. मैं हमेशा ऊंची दर का अनुमान लगाती हूं.”ज़्यादातर मोर्चों पर बांग्लादेश प्रदर्शन के मामले में सरकारी लक्ष्यों से आगे निकल चुका है. बांग्लादेश अभी मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है. कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश का प्रभुत्व दुनिया भर में जाना जाता है.

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हसीना का लक्ष्य है कि 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए.

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है. विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

हालांकि हसीना जानती हैं कि देश में टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए उद्योग-धंधों को बढ़ाना होगा. बांग्लादेश कम लागत वाले मैन्युफ़ैक्चरिंग हब से आगे निकलना चाहता है जो बाहरी धन और विदेशी मदद पर निर्भर है.

2009 में शेख हसीना ने डिजिटल बांग्लादेश लॉन्च किया था ताकि टेक्नॉलजी को बढ़ावा दिया जा सके. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में टेक्नॉलजी सेक्टर भी पांव पसार रहा है. ढाका के सीईओ भारत के आईटी सेक्टर से सीख उसे टक्कर देना चाहते हैं.

इस क्षेत्र में भारत को टक्कर देने की मंशा

शेख हसीना

भारत दवाइयों के निर्माण में भी काफ़ी आगे है और बांग्लादेश अपने पड़ोसी को इसमें भी टक्कर देने की मंशा रखता है. बांग्लादेश की सरकार देश भर में 100 विशेष आर्थिक क्षेत्रों का नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इनमें से 11 बनकर तैयार हो गए हैं और 79 पर काम चल रहे हैं.

बांग्लादेश छोटा सा देश है पर पर इसकी आबादी बहुत ज़्यादा है. यहां की आबादी बहुत ही सघन है. बांग्लादेश बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फ़ैसल अहमद बड़ी आबादी को अपने मुल्क की तरक्की में काफ़ी लाभकारी मानते हैं. फ़ैसल ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है कि सघन आबादी के कारण सोशल और इकनॉमिक आइडिया को ज़मीन पर उतारने में काफ़ी मदद मिलेगी.

बांग्लादेश में आर्थिक मोर्चे पर सब कुछ बढ़िया से चलने का ये मतलब ये क़तई नहीं है कि यहां चुनौतियां नहीं हैं. बांग्लादेश में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता है. बांग्लादेश की सियासत में दो महिलाओं शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का प्रभुत्व रहा है.जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था तब दोनों ही नेताओं के परिवारों की बांग्लादेश की आज़ादी में अहम भूमिका रही. पिछले तीन दशकों में दोनों महिलाएं सत्ता में आती-जाती रही हैं. इसके साथ ही दोनों जेल में भी रहीं.

ख़ालिदा ज़िया भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं और वो जेल से ही अपनी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी चला रही हैं. ख़ालिदा ज़िया का दावा है कि उन्हें झूठ मुक़दमों में फंसा जेल में जानबूझकर बंद किया गया है.

बांग्लादेश की महिलाएं

1981 से शेख हसीना सत्ताधारी अवामी लीग पार्टी का नेतृत्व कर रही हैं. इस पार्टी का गठन उनके पिता शेख मुजिबुर रहमान ने किया था. रहमान देश के पहले राष्ट्रपति थे. 1975 में सेना के कुछ लोगों ने रहमान और उनके परिवार के ज़्यादातर लोगों की हत्या कर दी थी.

अतीत के चुनावों में इस पार्टी को भारी जनसमर्थन मिला है. हालांकि विपक्ष और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग सत्ता हासिल करने के लिए चुनावों में धांधली और डराने-धमकाने का काम करती है.

अवामी लीग पिछले 10 सालों से सत्ता में थी. कई लोग इस बात को मानते हैं कि सत्ताधारी पार्टी की जीत से विकास को और रफ़्तार मिलेगी.बांग्लादेश की सफलता में रेडिमेड कपड़ा उद्योग की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है. कपड़ा उद्योग बांग्लादेश के लोगों को सबसे ज़्यादा रोज़गार मुहैया कराता है. कपड़ा उद्योग से बांग्लादेश में 40.5 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

2018 में बांग्लादेश के कुल निर्यात में रेडिमेड कपड़ों का योगदान 80 फ़ीसदी रहा. बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के लिए 2013 में राना प्लाज़ा आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं थी.कपड़ों की फ़ैक्ट्री की यह बहुमंजिला इमारत गिर गई थी और इसमें 1,130 लोग मारे गए थे. इसके बाद कपड़े के अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड कई तरह के सुधारों के लिए मजबूर हुए. नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है (फोटो स्रोत: गूगल) [ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. EkBharat News अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Rutvisha patel

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